નશાબંધી અને આબકારી ખાતું
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મોરારી બાપુ

6/30/2022 3:07:45 PM

वक्तव्य

" सभी भाइ बहेने । लोगो का एक तर्क है और गणित में यदी उसको बिठाया जाय तो शायद पहेली द्रष्टी से सबको योग्य भी लगता है । और वो तर्क ये है की नशाबंघी न हो और मध्यपान मुक्त हो सब जगह, तो राज्य को, राष्ट्र को बहोत आवक होती है । ये तर्क सब लाते है की ज्यादातर जो वो नशे के पदार्थ है, चाहे वो पिने का हो, फूंकने का हो, चाटने का हो, चबाने का हो जो हो, उस पर जो डयुटी लगती है गवर्नमेन्ट की, उससे राज्य और राष्ट्र को बहोत आवक होती है। ऐसा एक तर्क मेरे सामने आता है । यदी ये सब बंध हो जाय तो राष्ट्र को आथिर्क रुप में बहोत नुकसान होता है। लेकीन मेरा तर्क ये है उसके सामने, की जीवन मे आवक महत्व की है की आरोग्य महत्व का है? मेरा तर्क ये है, की जीवन मे मुनाफा हो फायदा हो, वो महत्व का है, की व्यकितकी मानसिक स्थिति महत्व की है? आदमी की मानसिक स्थिति ठीक रही तो एक रोटी में भी गुजारा करके वो साधु फकीर की तरह मस्त रह सकता है। व्यकित का आरोग्य ठीक होगा तो बिना नशा किये भी वो आदमी आपने परिवार का ठीक से पालन करेगा। तो मैं समझता हुं की आवक को देखकर आरोग्य का बलिदान नही देना चाहीए। और मेरी जैसे गुजरात मे नशाबंधी है, जीतनी मात्रा में है। इससे पुरे राष्ट्र के सामने और जगत के सामने बहोत बडा सबूत पेश किया जा रहा है, की गुजरात मे बहेन बेटीयां तीन बजे भी अकेली रीक्षा में जा सकती है, आ सकती है। बाराह बजे एक-बजे तक घर खुले होते है । लोग चर्चा करते है । इतनी शांति है । उस में, इस शांति में, इस गुजरात के विकास में, और विश्राममें नशाबंधी भी अपना एक स्थान रखती है । यदी ये हट जायेगी तो मैं फीर कहुं आवक जरुर बढेगी, आरोग्य खतम हो जायेगा । और करोडो रुपियों की आवक हो लेकिन जीसके लीये वो खर्च करनी है, वो आदमी ही जींदा नही रहेगा, वो केन्सर से पिडीत होगा, वो टीबी से पीडीत होगा, वो और कीसी रोग का शिकार हो जायेगा, वो अपने परिवार को छिन्नभिन्न कर देगा । दो प्याली पी कर के अपने घर मे एक आतंक मचा देगा, बच्चे को पीटेगा, गाली गलोच करेगा। तो एक व्यकित का नशा कितने परिवारो के नाश का कारण बन जाता है । तो एक साधु के नाते समाज को मेरी बिनती है की नशाबंधी रहे और लोगो का आरोग्य सुरक्षित रहे । हमारे गुजराती में सुखो की कुछ परिभाषाएं है । कई प्रकार के सुख है । इस में सबसे पहेला, गुजराती में कहे तो, पहेलु सुख ते जाते नर्या । संसार में सबसे बडा सुख है, तो आदमी की अपनी खुद की तंदुरस्ती, अपना खुद का स्वास्थ्य। और पुरा जगत साक्षी है की नशा करने के बाद दुसरो को तो नुकशान होता ही है। लेकीन खुद के जीसम को बहोत बडा नुकशान होता है। क्या हम ऐसा नही कर सकते की अच्छाई का, ईमानदारी का, एक दुसरे को प्यार और महोब्बत्त करने का, नात-जात धर्म के भेदभाव की दिवारो को तोड कर एक परस्पर प्रिती की ऐसी मघु पीए की जो नाश भी न करे और कभी उतरे भी ना? और व्यक्ति का, समाज का, परिवार का, राज्य का, राष्ट्र का विकास भी करे और विश्राम भी प्रदान करे। क्योंकी विकास हो और विश्राम न हो तो विकास दो कोडी का है । मैं सबको नम्र निवेदन करता हुँ की इस अभियान में सब गंभीरता से सोचे । तो व्यक्ति का आरोग्य बचेगा। आरोग्य बचेगा तो व्यक्ति का सौंदर्य बचेगा, सौंदर्य बचेगा तो व्यक्ति के संस्कार में एक बहोत बल बढेगा, आत्मीक सौंदर्य, तो संस्कार में बहोत बल आयेगा और संस्कार में बल आयेगा तो उसका फल पुरे समाज को बहोत सुमुधुर और मीठा मिलेगा। आपके अभियान को मेरी बहोत बहोत शुभ कामनाएं। आपके दर्शको के लीये भी मेरी बहोत बहोत शुभ कामनाएं । धन्यवाद । सबको प्रणाम । जय सियाराम "